पढ़ लूं ये ज़िन्दगी तो चांदी सा हर्फ़ है ,,
लिख दूं ये ज़िन्दगी तो सोने सा लफ्ज़ है ,,
तेरे बग़ैर थी तो कोई मोल नहीं था ,,
संग तेरे जी गई तो हीरे सा अक्स है .....
बिखरी हुई माटी सी बिखरी ये ज़िन्दगी थी ,,
बस तेरी इक छुअन से सांचे मे ढल गई ...
टूटे हुए मोती सा तनहा था दिल ये मेरा ,,
तूने पिरोया दिल में अनमोल रत्न है ...
तेरे बग़ैर थी तो कोई मोल नहीं था ,,
संग तेरे जी गई तो हीरे सा अक्स है .....
ख्वाबों की भीड़ थी पर ताबीर नहीं थी ,,
है जबसे तू नज़र में हर ख्वाब जी रही हूँ ...
लम्हे हज़ार थे पर इक पल हसीं नहीं ,,
तुझ संग मिला जो मुझको ,हर वक़्त जश्न है ...
तेरे बग़ैर थी तो कोई मोल नहीं था ,,
संग तेरे जी गई तो हीरे सा अक्स है .....
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